Saturday, February 7, 2009

एक मंज़र

यहाँ नदी पहाड़ बीमार पड़े

मंदिर मस्जिद में नॉन पड़े

कोई खाने वाला है ही नहीं

कुछ अनपढ़ कुछ बदहाल पड़े

आसिफ इकबाल

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