Saturday, February 28, 2009

गुजारिश

या खुदा तेरी खुदाई में इतनी खलिश क्यों है
ये रिश्ते में इतनी तपिश क्यों है
बारिश के साथ नूर बरसा कर तो देख
तेरे बन्दे को बन्दे से इतनी रंजिश क्यों है
- आसिफ इकबाल

Thursday, February 19, 2009

दिल्ली मेरी दिल्ली

दिल्ली की सर्दी आइस्क्रिम खिलाती है
इंडिया गेट पर गरीबो को जलाती है
गुदरी मे लिपटा एक मनुष कापता है
लाल पलंग पर दूसरा गर्मी से तंग है
दिल्ली के रक्षक टोयटा मे सवार है
गरीब और अमीर सभी के चोकेदार है
मधुशाला मे जा कर जो मदिरा पीता है
उनके लिए तो आकाश भी करीब है
भारत के संतान संसद मे विराजमान है
संसद के रखवाली मे सारा हिंदुस्तान है

-आसिफ इकबाल

Saturday, February 7, 2009

एक मंज़र

यहाँ नदी पहाड़ बीमार पड़े

मंदिर मस्जिद में नॉन पड़े

कोई खाने वाला है ही नहीं

कुछ अनपढ़ कुछ बदहाल पड़े

आसिफ इकबाल